कुपोषण को हराकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगी 'रंगीन थाली', जानें दिलचस्प बातें
कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच बिहार में गर्भवती महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की समस्या दूर कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मशरुम और मौसमी सब्जियों से भरपूर रंगीन थाली परोसी जा रही है । बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि विज्ञान केन्द्र और आंगनबाड़ी केन्द्रों के साथ मिलकर “अपनी क्यारी अपनी थाली ”योजना की शुरुआत की है । इसके लिए गांवों में शून्य बजट आधारित पोषण वाटिका की स्थापना की जा रही है और कृषि विज्ञान केन्द्र आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है । इसका उद्देश्य हर घर के निकट एक छोटी सी क्यारी का विकास करना है जो उस परिवार की थाली को हर दिन रंगीन बना सके ।
विश्वविद्यालय के निदेशक (शिक्षा विस्तार) आर के सोहाने ने बताया कि राज्य के नालंदा , पटना , पूर्णिया और खगड़यिा जिले से इस योजना की शुरुआत की गयी है और विशेषकर गर्भवती महिलाओं को दैनिक आहार में विटामिन , सूक्ष्म पोषक तत्व और खनिज लवण प्रबंधन पर सबसे अधिक जोर दिया जा रहा है ताकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास हो । उन्होंने कहा कि रंगीन थाली न केवल आकर्षक होती है बल्कि यह पोषक तत्वों का खजाना होती है जो एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए जरूरी है ।
इन महिलाओं को उच्च गुणवत्ता का मशरूम दिया जा रहा है जो प्रोटीन , विटामिन बी काम्पलैक्स , कैल्शियम , फॉस्फोरस , जिंक , कॉपर , आयोडीन , पोटाशियम,कोबाल्ट आदि से परिपूर्ण है । सप्ताह में कम से कम चार या पांच दिन महिलाओं और बच्चों को मशरूम के अलावा कम से कम सौ ग्राम मौसमी पत्तेदार सब्जियां और फल भी दिये जा रहे हैं । गांव में महिलाएं खाने में ज्यादातर काबोर्हाइड्रेट लेती हैं जो संतुलित आहार नहीं है । डॉ. सोहाने ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत वर्ष 2022 तक कुपोषण मुक्त भारत की स्थापना करना है । इस समय तक बच्चों में कुपोषण के स्तर को 38.7 प्रतिशत से घटाकर 20.7 प्रतिशत तथा महिलाओं एवं लड़कियों में 53 प्रतिशत से कम कर 17.7 प्रतिशत पर लाना है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों को दोपहर के भोजन में रंगीन थाली परोसी जा रही है । वैज्ञानिकों ने खरीफ और रबी मौसम के लिए फल और सब्जियों के 12 किस्मों का चयन किया है जिनमें साग,गोभी , टमाटर , चुकन्दर , मूली , गाजर आदि शामिल है।
नालंदा जिले की 25 उत्पादन इकाइयों में मशरूम और अन्य सब्जियों का उत्पान किया जा रहा है। स्थानीय प्रभावशाली लोगों की मदद से इन इकाइयों में मासिक 200 किलो मशरूम का उत्पादन हो रहा है । पूर्णिया जिले में 50 पोषण वाटिकाओं का निमार्ण किया गया है जिससे एक हजार से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं । हर साल बाढ की विभीषिका झेलने वाले खगड़यिा जिले के 120 आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी पोषण वाटिका का निमार्ण किया गया है । इन कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों की भी भागीदारी की जा रही है और उन्हें कुपोषण को खानपान से आसानी से दूर करने के उपाय बताये जा रहे हैं।

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