Vijay Sales [CPS] IN

Friday, July 31, 2020

ये आयुर्वेदिक काढ़ा करेगा कोरोना से लड़ने में मदद, स्वामी रामदेव से जानिए बनाने का सिंपल तरीका आयुर्वेदिक काढ़ा की सही मात्रा इस, काढ़ा में सभी मसालों को सही मात्रा में इस्तेमाल करें। इसके साथ ही गर्म तासीर चीजों को कम मात्रा में डाले। वहीं एक दिन में 2-3 बार ही काढ़ा का सेवन करें।

आयुर्वेदिक काढ़ा की सही मात्रा

इस, काढ़ा में  सभी मसालों को सही मात्रा में इस्तेमाल करें। इसके साथ ही गर्म तासीर चीजों को कम मात्रा में डाले। वहीं एक दिन में 2-3 बार ही काढ़ा का सेवन करें। 

आयुष मंत्रालय और भारत सरकार द्वारा समय-समय पर लोगों से सलाह दी जाती हैं कि खुद की इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा का सेवन करें। वहीं लोगों द्वारा अधिक मात्रा में सेवन करने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।


कोरोना वायरस महामारी से हर कोई परेशान हैं। जहां लाखों लोग इस महामारी से जान गवां चुके हैं। इस महामारी के संक्रमण से बचने के लिए आपकी इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होना बहुत ही जरूरी है। इसी कारण आयुष मंत्रालय और भारत सरकार द्वारा समय-समय पर लोगों से सलाह दी जाती हैं कि खुद की इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा का सेवन करें। लेकिन कई लोग ऐसे हैं कि उनके अंदर कोरोना का इतना ज्यादा डर बैठ गया है कि वह दिनभर में कई बार काढ़ा का सेवन कर रहे हैं। अगर आप भी इस लिस्ट में शामिल हैं तो फिर सचेत हो जाए। अत्यधिक काढ़ा पीना भी आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

आयुर्वेदिक काढ़ा तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, दालचीनी, काली मिर्च, लौंग आदि मसालों के साथ बनाया जाता है। जिसका सेवन अगर सीमित मात्रा में किया जाए तो इम्यूनिटी बूस्ट होने के साथ-साथ कई बीमारियों से भी छुटकारा मिल सकता है। लेकिन अगर अधिक मात्रा में सेवन किया तो आप पेॉ संबंधी कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

काढ़ा का ज्यादा सेवन क्यों हैं हानिकारक?

आपको बता दें कि इस आयुर्वेदिक काढ़ा को बनाने के लिए तुलसी, गिलोय, हल्दी अश्वगंधा, दालचीनी, काली मिर्च, लौंग, पिपली जैसे कई मसालों को मिलाकर बनाया जाता है। इन सभी मसालों की तासीर गर्म होती है। जिसका ज्यादा सेवन करने से बुखार, नकसीर आदि समस्याओं हो सकती है।

कोरोना से बचाएंगे ये 5 इम्यूनिटी बूस्टर, घर पर रोज करें इनका पालन इन संकेतों से जानें कि काढ़ा का कर लिया है ज्यादा सेवन

अगर आप इस आयुर्वेदिक काढा का ज्यादा सेवन कर लेंगे तो आपको शरीर में कुछ न कुछ संकेत मिल जाएंगे। जिन्हें जानकर आप काढ़ा का सेवन कम कर सकते हैं।

 मुंह में छाले पड़ जाना। 

  • नाक से खून आना।
  • अधिक चक्कर आना।
  • आंखों के सामने अंधेरा छा जाना। 
  • गैस या कब्ज की समस्या होना।
  •  पेट में जलन होना। 
  • स्किन में छोटे-छोटे दाने निकल आना।
  •  वजन तेजी से कम होना
  • डायरिया की समस्या हो जानाकई लोगों को काढ़ा का ज्यादा सेवन करने से बुखार भी आ जाता है। 
ये आयुर्वेदिक काढ़ा करेगा कोरोना से लड़ने में मदद, स्वामी रामदेव से जानिए बनाने का सिंपल तरीका आयुर्वेदिक काढ़ा की सही मात्रा

इस, काढ़ा में  सभी मसालों को सही मात्रा में इस्तेमाल करें। इसके साथ ही गर्म तासीर चीजों को कम मात्रा में डाले। वहीं एक दिन में 2-3 बार ही काढ़ा का सेवन करें। 


शनिदेव के प्रोकोपों से मुक्ति पाने के लिये हर शनिवार करें व्रत और पढ़ें ये कथा

शनिदेव के प्रोकोपों से मुक्ति पाने के लिये हर शनिवार करें व्रत और पढ़ें ये कथा


शनिदेव के प्रोकोपों से मुक्ति पाने के लिये हर शनिवार करें व्रत और पढ़ें ये कथा

शनिवार को शनिदेव की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान शनि के प्रभाव व्यक्ति पर पड़ते हैं जिसके कारण वह परेशानियों से घिर जाता है। लेकिन शनिदेव के कष्टों से मुक्ति पाने के लिये हर शनिवार को व्रत कर कथा पढ़ना चाहिये। इससे शनि के प्रकोपों से मुक्ति मिलती है..


शनिवार व्रत कथा-

एक बार ब्रह्मांड के नवग्रहों में आपस में विवाद हो गया। वे सभी तय करना चाहते थे कि उनमें सबसे बड़ा कौन है? इस विवाद का हल निकालने वे सभी देवराज इंद्र के पास पहुंचे। इंद्र ने विवाद से बचने के लिए नवग्रहों से कहा कि धरती पर उज्जैन में विक्रमादित्य नाम का राजा है, जो सदा न्याय करता है। वही आपके विवाद का निर्णय कर सकता है। इंद्र की बात मान नवग्रह राजा विक्रमादित्य के पास अपना मामला लेकर पहुंचे। राजा जानते थे कि वे जिसे छोटा बताएंगे, वही कुपित हो जाएगा, पर वे न्याय की राह नहीं छोड़ना चाहते थे।

राजा ने नव धातुओं के नौ सिंहासन बनाए और हर ग्रह को उनके अनुरूप क्रमशः स्थान ग्रहण करने को कहा। इस तरह लोहे का सिंहासन सबसे बाद में था, जो शनिदेव का था। इस तरह शनिदेव को सभी ग्रहों में अंतिम स्थान मिला। इससे शनिदेव राजा पर कुपित हो गए और अपना समय आने पर विक्रमादित्य को दुख देने की चेतावनी देकर चले गए।



राजा विक्रमादित्य की शनि की साढ़े साती

समय के साथ राजा विक्रमादित्य की कुंडली में शनि की साढ़े साती आई। इसी समय शनिदेव घोड़े के सौदागर बन कर राजा के पास आए। राजा विक्रमादित्य एक घोड़ा पसंद कर जैसे ही उसकी सवारी करने लगे, वह राजा को लेकर जंगल में भाग गया और गायब हो गया। जंगल में भटककर राजा किसी नए देश जा पहुंचे। वहां एक शहर में एक सेठ से बात करने लगे। सेठ के यहां उनके पहुंचते ही खूब सामान बिका, तो वह प्रसन्न होकर राजा को भोजन कराने घर ले गया। भोजन करते हुए राजा ने देखा कि एक खूंटी पर हार लटका है और वह खूंटी ही उसे निगल रही है। राजा के भोजन करने पर सेठ ने खूंटी पर हार ना पाया, तो उसे अपने राजा के यहां कैद करवा दिया। राजा ने चोरी के आरोप में विक्रमादित्य के हाथ कटवा दिए।

इसके बाद विकलांग राजा को एक तेली अपने घर ले गया और कोल्हू के बैलों को हांकने का काम दे दिया। इस तरह साढ़े सात साल बीत गए और एक रात शनि की महादशा समाप्त होते ही विक्रमादित्य ने ऐसा राग छेड़ा कि राज्य की राजकुमारी ने उनसे विवाह का प्रण ले लिया। लाख समझाने पर भी राजकुमारी ना मानी तो राजा ने विकलांग विक्रमादित्य से अपनी राजकुमारी का विवाह कर दिया। रात्रि में शनिदेव ने विक्रमादित्य के सपने में आकर कहा कि तुमने मुझे सबसे छोटा ठहराया था ना। अब देखो मेरा ताप और बताओ कि किस ग्रह में मेरे जितना प्रकोप है?

राजा ने शनिदेव से माफी मांगी जिसके बाद शनिदेव ने उन्हें माफी दी। सुबह सब तरफ राजा विक्रमादित्य और शनिदेव की कथा की चर्चा होने लगी। विक्रमादित्य की जानकारी मिलते ही वह व्यापारी भी माफी मांगने आया और उन्हें फिर भोजन का निमंत्रण दे गया। राजा जब उसके यहां भोजन कर रहे थे तो उसी खूंटी ने सबके सामने हार वापस उगल दिया। इस तरह सभी के सामने स्पष्ट हो गया कि राजा ने चोरी नहीं की थी। व्यापारी ने राजा से कई बार माफी मांगी और अपनी कन्या का विवाह उनके साथ कर दिया। राजा विक्रमादित्य अपनी दोनों रानियों और ढेर सारे उपहारों के साथ उज्जैन वापस आए और राजकार्य संभाल लिया।

शनिवार व्रत कथा





बहुत समय पहले की बात है, जब देवी-देवता, ऋषि-मुनि आदि स्वर्ग लोक से लेकर भूलोक तक विचरण कर सकते थे। एक बार स्वर्गलोक में वास कर रहे 9 ग्रहों के बीच विवाद छिड़ गया कि सबसे बड़ा और शक्तिशाली ग्रह कौन है। विवाद जब ज्यादा बढ़ गया और नवग्रहों के आपस में विवाद होने से जनजीवन प्रभावित होने लगा। तब देवराज इंद्र ने उन्हे दरबार में बुलाया और उनकी समस्या को सुना, परंतु उनके पास भी इसका समाधान नहीं मिला। उन्होने नवग्रहों से कहा कि आप लोग भूलोक में राजा विक्रमादित्य के पास जाएं वहीं आपको इसका जवाब देंगे। नवग्रह राजा के पास पहुंचे उन्होंने सवाल किया कि कौन सा ग्रह सबसे बड़ा और बलवान है। विक्रमादित्य पहले तो थोड़ा घबराए फिर उन्होंने सोचा कि अगर वह कोई भी जवाब देते हैं तो ये आपस में ही बैर कर बैठेंगे इसलिए उन्होंने अपनी सूझबूझ से एक उपाय निकाला। उन्होंने प्रत्येक ग्रह के लिए सोने-चांदी और लोहे के सिंहासन बनवाए और कहा कि जिसका जो भी आसन है धारण करें जिसका सिंहासन सबसे पहले है, सोने का है वह सबसे बड़ा जिसका सबसे पीछे है वह सबसे छोटा है। अब लोहे का सिंहासन सबसे पीछे था जो कि शनिदेव के लिए था। लोहे का सिंहासन सबसे पीछे देखकर शनिदेव नाराज हो गए। उन्होने विक्रमादित्य से कहा कि अरे मूर्ख, सूर्य, बुध, शुक्र एक राशि में एक महीने और मंगल 1.5 महीने और चंद्रमा 2 महीने और बृहस्पति 13 महीने रहते हैं लेकिन मैं एक राशि में 2.5 साल से लेकर 7 सात साल तक रहता हूं। तुमने मेरा अपमान किया है जो ठीक नहीं है। यह कहकर शनिदेव अंतर्ध्यान हो गए।

अब वह दिन भी आ गया जब विक्रमादित्य पर शनि की साढ़े साती की दशा आई। अब शनिदेव घोड़ा व्यापारी के रूप में विक्रमादित्य की नगरी में जा पहुंचे। विक्रमादित्य ने घोटा पसंद किया और उस पर सवार हो गए। घोड़े पर सवार होते ही घोड़े को पंख लग गए और वह राजन को सूदूर वन ले गया और वहां पटककर अदृश्य हो गया। विक्रमादित्य घने जंगल में रास्ता भटक गए और राज्य लौटने का रास्ता भी भूल गए। तब एक चरवाह दिखाई दिया और अपनी अंगूठी देकर उससे पानी पिया और पास के नगर जाने का रास्ता पूछा। चलते -चलते राजा थक गए और एक सेठ की दुकान पर जाकर बैठ गए। उनके बैठते ही अचानक दुकान पर आने वालों की संख्या बढ़ने लगी। सेठ ने सोचा यह व्यक्ति बहुत भाग्यशाली है, इसलिए सेठ ने राजा को रोक लिया और उनसे भोजन ग्रहण करने का अनुरोध किया। सेठ राजा को भोजन करता हुआ छोड़कर थोड़ी देर के लिए बाहर चला गया। अब खाते खाते विक्रमादित्य ने देखा कि खूंटी पर टंगे हार को खुंटी निगल रही है। सेठ जब वापस आया तो हार गायब देखकर उसे राजा पर शक हुआ। उसने नगर के सैनिक बुलाकर विक्रमादित्य को उनके हवाले कर दिया। नगर के राजा ने विक्रमादित्य के हाथ-पैर कटवाने का आदेश दे दिया। अब राजा की हालत बहुत बुरी हो गई। इतने में एक तेली उधर से गुजरा और उसे विक्रमादित्य पर रहम आ गया। उसने उसे अपने कोल्हू पर बैठा दिया और बैलों को हांकने का काम दिया। इससे विक्रमादित्य को दोजून की रोटी मिलने का जुगाड़ बन गया। धीरे-धीरे राजा का बुरा वक्त गुजरने लगा और शनि की दशा समाप्त हो गई।

वर्षा ऋतु आई मेघ छाने लगे और एक रात विक्रमादित्य मल्हार गाने लगे कि वहीं पास से राजकुमारी मनभावनी की सवारी निकल रही थी। जैसे ही राजकुमारी के कानों में विक्रमादित्य के स्वर पड़े वह मुग्ध हो गई। उसने दासी को भेजा तो पता चला कि विक्रमादित्य अंपग है। लेकिन राजकुमारी ने विक्रमादित्य से विवाह करने ही ठान ली और आखिरकार विक्रमादित्य और मनभावनी का विवाह संपन्न हो गए। विवाह के बाद राजा विक्रमादित्य और राजकुमारी तेली के घर में रहने लगे। उसी रात स्वप्न में शनिदेव राजा को दिखाई दिए औऱ उन्होंने कहा कि राजा तुमने मेरा प्रकोप देख लिया। मैंने तुम्हें अपने अपमान का दंड दिया है। विक्रमादित्य को सारी बातें याद आई और उन्होने शनिदेव से क्षमा मांगी और कहा कि शनिदेव मुझे आपकी शक्तियों का अच्छे से ज्ञान हो गया है और आपसे विनती है कि जैसे मेरे साथ किया है वैसे किसी के साथ मत कीजिएगा। तब शनिदेव ने कहा कि ठीक है मैं तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार करता हुं, आज के बाद जो भी मेरे लिए व्रत रखेगा, मेरी पूजा करेगा और व्रतकथा सुनेगा वह सभी कष्टों से मुक्त हो जाएगा और उसकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाएगी। इतना कहकर शनिदेव अदृश्य हो गए। जब राजा सुबह उठे तो उनके हाथ-पैर ठीक हो गए और यह देखकर राजकुमारी को खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तब विक्रमादित्य ने मनभावनी को पूरी आपबीती सुनाई। इसेक बाद राजा ने अपने राज्य लौटने की इच्छा जताई। इधर सेठ को जब इस बात का पता चला तो वह दौड़ता चला आया और राजा से माफी मांगने लगा। राजा विक्रमादित्य ने उसे क्षमा कर दिया क्योंकि वह जानते थे कि यह सब शनिदेव की प्रकोप की वजह से हुआ है। अब सेठ ने राजा को दुबारा भोजन का निमंत्रण दिया। यहां भी सबके सामने चमत्कार

करिअर फ्लॉप पण लाइफस्टाइल आलिशान; जुगल हंसराज आता करतो ‘हे’ काम

करिअर फ्लॉप पण लाइफस्टाइल आलिशान; जुगल हंसराज आता करतो ‘हे’ काम


बॉलिवूडमध्ये असे अनेक सेलिब्रिटी आहेत ज्यांना पहिल्याच चित्रपटानंतर फार प्रसिद्धी मिळाली. पण नंतर ते इंडस्ट्रीतून गायबच झाले. असाच एक अभिनेता म्हणजे जुगल हंसराज. १९८३ मध्ये प्रदर्शित झालेल्या 'मासूम' या चित्रपटात जुगलने बालकलाकार म्हणून काम केलं. 'पापा कहते हैं' या चित्रपटात हिरो म्हणून पहिल्यांदा त्याने काम केलं. जुगल आता चित्रपटसृष्टीत अभिनेता म्हणून सक्रिय नाही.


२००० मध्ये प्रदर्शित झालेल्या 'मोहब्ब्तें' या चित्रपटामुळे त्याला चांगली ओळख मिळाली. या चित्रपटात त्याने एका विद्यार्थ्याची भूमिका साकारली होती. या मल्टिस्टारर चित्रपटानंतर त्याने कोणताच हिट चित्रपट दिला नाही.


२००२ मध्ये त्याने 'प्यार तुम्ही से कर बैठे' या चित्रपटात भूमिका साकारली. मात्र हा चित्रपट बॉक्स ऑफिसवर फ्लॉप ठरला. त्यानंतर जुगलने खूप मोठा ब्रेक घेतला. २०१० मध्ये 'प्यार इम्पॉसिबल'मध्ये तो झळकला. हा चित्रपटसुद्धा बॉक्स ऑफिसवर अपयशी ठरला.


या चित्रपटानंतर जुगलने अभिनय क्षेत्राला रामराम केलं. २०१४ मध्ये त्याने गर्लफ्रेंड जास्मिनशी ऑकलँडमध्ये लग्नगाठ बांधली. या लग्नसोहळ्याला फक्त दोघांचे कुटुंबीय व मोजका मित्रपरिवार उपस्थित होता.


जुगलची पत्नी जास्मिन न्यूयॉर्कमध्ये इन्वेस्टमेंट बँकर आहे.


जुगल सध्या करण जोहरच्या धर्मा प्रॉडक्शन हाऊसमध्ये काम करतो. क्रिएटिव्ह टीममध्ये तो काम करतो. तो उत्तम लेखन करतो. करण आणि जुगल एकमेकांचे चांगले मित्र आहेत. करणच्या 'कुछ कुछ होता है' चित्रपटाच्या शीर्षकगीतातील ओळी जुगलने लिहिली होती.


जुगल विद्या बालनच्या 'कहानी २'मध्ये खलनायकाच्या भूमिकेत झळकला होता. या चित्रपटात त्याची फार छोटी भूमिका होती.


माधुरी दीक्षितसोबत त्याने 'आजा नचले' चित्रपटात स्क्रीन शेअर केला होता.

Wednesday, July 29, 2020

धक्कादायक! अभिनेत्री मयुरी देशमुखच्या पतीची आत्महत्या

धक्कादायक! अभिनेत्री मयुरी देशमुखच्या पतीची आत्महत्या

मराठी सिनेसृष्टीतील अभिनेत्री मयुरी देशमुख हिच्या पतीनं आत्महत्या केली आहे.

नांदेड : 'खुलता खळी खुलेना' मालिकेतून घराघरांत पोहोचलेली अभिनेत्री मयुरी देशमुख हिचा पती अभिनेता आशुतोष भाकरे यानं आत्महत्या केल्याचं समोर आलं आहे. आशुतोषनं राहत्या घरी गळफास घेतला असून या घटनेनं त्यांच्या कुटुंबियांना मोठा धक्का बसला आहे.

आशुतोषच्या आत्महत्येचं कारण अद्यापही समोर आलं नाही. काही दिवसांपूर्वी आशुतोषनं आत्महत्येसंदर्भात एक व्हिडिओ शेअर केला होता. या व्हिडिओत माणूस आत्महत्येचं पाऊल का उचलतो याबद्दल सांगण्यात आलं होतं. त्यानंतर आशुतोषनं हे पाऊल उचलल्यानं सर्वांनाच धक्का बसला आहे. दरम्यान, पोलिसांनी या प्रकरणाता तपास सुरू केला आहे.

आशुतोषनं ‘भाकर’, ‘इच्यार ठरला पक्का’ या चित्रपटात काम केलं आहे. २० जानेवारी २०१६ रोजी मयुरी आणि आशुतोष विवाहबद्ध झाले होते.



खुलता खळी खुलेना मालिकेून मयुरी घरोघरी पोहोचली. त्यानंतर तिनं व्यावसायिक नाटकांमध्येही काम केलं. 

आशुतोषचे आई-वडील नांदेडमधील ख्यातनाम डॉक्टर आहेत.

गेल्या वर्षी 'बिग बॉस मराठी'च्या दुसऱ्या पर्वात सहभागी होणाऱ्या कलाकारांबाबत सध्या तर्कवितर्क लावले जात असतना सोशल मीडियावर मयुरीचं नाव चर्चेत आलं होतं. परंतु, खुद्द मयुरीनं या सगळ्या अफवा असल्याचे स्पष्ट केलं होतं. 'बिग बॉस मराठी २ मध्ये सहभागी होण्यासाठी माझ्याशी संपर्क साधला गेला होता हे खरं आहे. परंतु, मी शोमध्ये सहभागी होणार नाहीए. मला वाटते मी या शोसाठी योग्य व्यक्ती नाही. मला माझं खासगी आयुष्य शांतपणे जगायला आवडतं. माझ्या खासगी आयुष्यातील गोष्टी मी लोकांशी शेअर करत नाही. शिवाय, बिग बॉसच्या तारखा आणि माझ्या आगामी चित्रपटाच्या चित्रीकरणाच्या तारखा सारख्याच असल्यानं मला होकार देणं शक्य नव्हतं.' असं ती म्हणाली होती.


आशुतोषने फेसबुरवर काही दिवसांपूर्वी एक व्हिडीओ शेअर केला होता. या व्हिडीओतील व्यक्ती माणूस आत्महत्या का करतो? याबाबत विश्लेषण करताना दिसत होती. मात्र, तरीही आशुतोष इतका टोकाचा निर्णय घेईल, अशी कुणाला कल्पना नव्हती. आशुतोष गेल्या काही दिवसांपासून नैराश्यात होता, अशी प्राथमिक माहिती समोर येत आहे. त्याने आज (29 जुलै) सकाळी 11 ते 12 वाजेच्या सुमारास राहत्या घरी गळफास घेऊन आत्महत्या केली.

2017 साली मयुरीने ‘व्हॅलेन्टाईन डे’च्या निमित्ताने ‘लोकसत्ता’साठी लिहिलेल्या लेखात आपली लव्हस्टोरी सांगितली होती.





भन्नाट चॅलेंज! या फोटोतील हरीण शोधा नाहीतर... डोळ्यांची तपासणी करा

भन्नाट चॅलेंज! या फोटोतील हरीण शोधा नाहीतर... डोळ्यांची तपासणी करा.


सावधान! हा फोटो काळजीपूर्वक पहा. या फोटोमध्ये एक हरीण लपलेले आहे. ते शोधून दाखवा. अनेकदा आपण तासंतास लॅपटॉप, मोबाईलवर टक लावून पाहत असतो. यामुळे डोळे खूप थकलेले असतात. या थकलेल्या डोळ्यांना काहीसा व्यायाम आम्ही तुमच्यासाठी घेऊन आलो आहोत. या फोटोत जर तुम्हाला या फोटोत हरीण सापडले नाही तर खालील फोटोत तुम्हाला ते कुठे लपलेले आहे ते सांगणार आहोत. चला तर मग एकदा होऊनच जाऊद्या डोळ्यांची चाचणी....

बहुरंगी गाय....पहिल्यांदा डोळे मार खातात परंतू नजर स्थिर केल्यावर लक्षात येते या दोन गाई आहेत.

कार घेऊन थेट मैदानात फुटबॉलची मजा घेतोय.


हिच्या पाठीवरचा हात पहा....कोणाचा आहे?


शांतता राखा....वाघ दमून भागून झोपलाय.


मुलाला सांबराची शिंगे फुटलीत ती पण प्लेटमध्ये.


अरे बापरे, किती मोठे केस या मॉडेलचे.


सावल्यांचा खेळ कॅमेऱ्यात टिपलाय.


फोटो असा काढलाय की कॅमेरामनचे डोके कुत्र्याचे भासत आहे.


डोळ्यांची टेस्ट झाली. आता तुम्हाला न दिसलेले हरीण पहा कुठे लपलेले होते ते. टेन्शन नका घेऊ हार जीत तो होती रहती है...

Sunday, July 26, 2020

यह जापानी लड़की है या लड़का, सच्चाई जानकर रह जाएंगे हैरान

यह जापानी लड़की है या लड़का, सच्चाई जानकर रह जाएंगे हैरान

हटके डेस्क। कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक ऐसी जापानी लड़की की तस्वीरें वायरल हुईं, जिसकी सच्चाई सामने आने पर लोग अचरज में पड़ गए। बात ही ऐसी थी। जिस लड़की की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, वह एक बेहद क्यूट जापानी स्कूल गर्ल दिखती है। लेकिन असलियत में ऐसा नहीं है। दरअसल, वह लड़की नहीं, 43 साल का एक शादीशुदा पुरुष है जिसकी एक बच्ची भी है। इसका नाम है ताकुमा तानी। 1977 में जन्मे ताकुमा तानी एक सिंगर हैं। जब वे स्कूल में पढ़ते थे, तभी से उन्हें म्यूजिक से गहरा लगाव था। 28 साल की उम्र में वे जापान के एक रॉक ग्रुप में शामिल हो गए और म्यूजिक को ही अपना प्रोफेशन बना लिया। जब वे 34 साल के हुए तो उनके मन में यह आइडिया आया कि क्यों नहीं एक स्कूली गर्ल के रूप में अपना मेकओवर कर लें। जब उन्होंने ऐसा किया तो यह उन्हें बहुत अच्छा लगा और दूसरे लोगों को भी यह काफी पसंद आया। अब वे एक स्कूल गर्ल के रूप में ही परफॉर्म करते हैं। वे काफी पॉपुलर हैं। ट्विटर पर उनके 20 हजार से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं। देखें उनकी फोटोज। 


ताकुमा का रंग-रूप ही ऐसा है कि जब वे लड़कियों के कपड़े पहन लेते हैं तो कोई भी उन्हें देखकर धोखा खा सकता है। 162 सेमी लंबे और 47 किलो वजन के ताकुमा को लड़की का रूप बनाने के लिए काफी मेकअप करना पड़ता है।

ताकुमा जापान के एक टीवी शो में 'क्रॉस ड्रेसिंग चैम्पियन' के विनर भी रह चुके हैं।

सिंगर होने के साथ-साथ ताकुमा एक सफल उद्यमी भी हैं। उन्होंने महिलाओं के कपड़ों का ब्रांड अतुकोस्वेत टोक्यो (AtukoSvet Tokyo) लॉन्च किया है। इसके अलावा वह लड़कियों के कपड़ों के लिए मॉडलिंग भी करते हैं।

यह है ताकुमा तानी का ऑरिजिनल रूप। साल 2016 में ही ताकुमा एक बेटी के पिता बने। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीर भी शेयर की थी, जिसमें उनके गोद में उनकी बेटी थी और उन्होंने कैप्शन में लिखा था, "मैं एक पिता हूं।"


ताकुमा तानी का कहना है कि जो मन करे,  वह करना चाहिए। वे कहते हैं कि उन्हें किसी की कोई परवाह नहीं है, लेकिन लोग एक लड़की के रूप में उन्हें काफी पसंद करते हैं। 

एक स्कूल गर्ल के रूप में ताकुमा तानी काफी ग्लैमरस लगते हैं। जब वे लड़की के रूप में परफॉर्म करते हैं, तो उनके चाहने वाले काफी खुश नजर आते हैं। 

एक ग्लैमरस स्कूल गर्ल के रूप में ताकुमा तानी के कई म्यूजिक वीडियो बेहद फेमस हो चुके हैं। 

ताकुमा तानी के चाहने वालों की तादाद लगातार बढ़ती ही जा रही है। लोग उन्हें इसी रूप में देखना पसंद करते हैं। 

ताकुमा तानी इस तरह मेकअप करते हैं कि किसी जापानी गुड़िया की तरह नजर आते हैं। उन्हें देख कर किसी के लिए यह समझ पाना मुश्किल है कि वे लड़की नहीं, बल्कि एक पुरुष हैं। 

ताकुमा तानी का कहना है कि लड़की के रूप में मेकओवर करने में उन्हें काफी समय लगता है। उन्होंने कई तरह की ड्रेसेस ले रखी हैं। उनका कहना है कि वे जब वीडियो या तस्वीरों में अपना यह रूप देखते हैं तो खुद भी दंग रह जाते हैं। 

राम मंदिर निर्माण के लिए इस राज्य के 101 जगहों से भेजी गई मिट्टी, जानें पूरी कहानी

राम मंदिर निर्माण के लिए इस राज्य के 101 जगहों से भेजी गई मिट्टी, जानें पूरी कहानी

सीतामढ़ी (Bihar) । यूपी के अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर निर्माण की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए देशभर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों से पवित्र मिट्टी भेजी जा रही है। इसमें बिहार के 101 जगह की मिट्टी शामिल है, जिसमें भगवान राम के ससुराल और माता सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी भी शामिल हैं। जहां के पवित्र स्थानों से मिट्टी एकत्रित कर अयोध्या भेजी गई है। बता दें कि 5 अगस्त को मंदिर का शिलांयास पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे।


राम मंदिर निर्माण में बिहार के 101 तीर्थस्थलों, नदियों से मिट्टी और जल अयोध्या भेजी गई है। मिट्टी और जल भेजने का बीड़ा विश्व हिंदू परिषद ने उठाया है।

विहिप के सभी कार्यकर्ता काफी उत्साहित होकर अलग-अलग जगहों से मिट्टी इकट्ठा किए हैं। मिट्टी को डाक से अयोध्या भेजा गया।

सीतामढ़ी में मां जानकी जन्मोत्सव आयोजन समिति की अगुवाई में पांच मंदिर, जानकी मंदिर, पुनौरा मंदिर, हलेस्वरस्थान मंदिर, पंथपाकड़ स्थित सीता मंदिर और बगही धाम से मिट्टी इकट्ठा की गई। 

जानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत श्री नृत्यगोपाल दास जी महाराज और महासचिव चंपत राय को सौंपी गई। 


कहते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लिए सीतामढ़ी में ही शिला पूजन की शुरुआत हुई थी। इस आंदोलन में हिस्सा लेने कई शहरवासी कार सेवा में 1990 और 1992 में अयोध्या गए थे। आंदोलन के दौरान ही कई लोग जेल भी गए थे।

सीतामढ़ी में 5 अगस्त को महा उत्सव मनाया जाएगा। जानकी जन्मोत्सव आयोजन समिति ने सीतामढ़ी के समस्त नागरिकों से आग्रह किया है कि राम मंदिर के लिए भूमि पूजन के समय लोग अपने-अपने घरों में पूजा-आरती कर उत्सव मनाएं. साथ ही लोग उस दिन दीपोत्सव भी मनाएं।