पुणे-: पुण्याला पुणे हे नाव कसे पडले, पुण्याचा इतिहास, भूगोल, आणि पुण्याची संस्कृती माहिती आहे का?....
भाग ---- 3
संस्कृति
पुणे को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी कहकर भी संबोधित किया जाता है। पुणे की मराठी को मराठी भाषा का मानक-रुप (standard) माना जाता है। पुणे मे वर्ष भर सांस्कृतिक कार्यक्रम के रेलचेल होते रहते है। पुणे मे संगीत, कला, साहित्य की भरमार है।
गणेशोत्सव
1894 मे लोकमान्य तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव शुरु किया। भाद्रपद (अगस्त नही तो सितंबर) महीने मे आने वाले इन दस दिनो की अवधि मे पुणे शहर चैतन्यमय होता है। देश-परदेश से लोग इस उत्सव मे भाग लेने पुणे आते है।
जगह-जगह छोटे-बडे गणेश मंडल के मंडपो को सजाया जाता है। इस उत्सव के दरमयान महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल पुणे उत्सव नामक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराता है, जिसमे संगीत, नृत्य, मैफिली, नाटक और खेल समाविष्ट होते है। दस दिवस चलने वाला यह उत्सव गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होता है। अनंत चतुर्दशी के सुबह शुरु होने वाला विसर्जन अगले दिन तक चलता रहता है। प्रमुख पाँच मंडल है -
कसबा गणपती (यह पुणे के ग्राम देवता है)
तांबडी जोगेश्वरी
गुरूजी तालीम
तुलशीबाग
केसरी वाडा (यह मंडल तिलक पंचांग के अनुसार गणेशोत्सव को सजाता है)
ये पांच गणपतीयो के साथ साथ दगडूशेठ हलवाई गणपतीको भी पुणे का प्रमुख गणपती माना जाता है।
तांबडी जोगेश्वरी
गुरूजी तालीम
तुलशीबाग
केसरी वाडा (यह मंडल तिलक पंचांग के अनुसार गणेशोत्सव को सजाता है)
ये पांच गणपतीयो के साथ साथ दगडूशेठ हलवाई गणपतीको भी पुणे का प्रमुख गणपती माना जाता है।
पुणे मे गणेशोत्सव मंडल प्राणप्रतिष्ठा की गई मूर्ति विसर्जीत कर के उत्सव मर्ति वापस ले जाते है। विसर्जन के दरमयान ढोल, लेझीम जैसे अनेक पथके होते है। अनेक विद्यालय अपने पथके सिखाते है।
सवाई गंधर्व संगीत महोत्सवसंपादित करें
दिसंबर महिने मे अभिजात संगीत मैफली का कार्यक्रम पुणे मे होता है जिसे सवाई गंधर्व संगीत महोत्सव कह कर संबोधित किया जाता है। तीन रातो तक चलने वाला इस उत्सव मे सुप्रसिध्द हिंदुस्तानी व कर्नाटक संगीतज्ञ भाग लेते है। शास्त्रीय संगीत प्रेमियो के लिए उत्सव एक पर्व के समान होता है।
रंगभूमि
मराठी रंगभूमि मराठी संस्कृति का अविभाज्य भाग है। मराठी नाटक प्रायोगिक व व्यावसायिक दोनो होते है। पुणे मे मराठी नाटक काफी लोकप्रिय है। टिलक स्मारक मंदिर, बालगंधर्व रंगमंदिर, भरत नाट्य मंदिर, यशवंतराव चव्हाण नाट्यगृह, सुदर्शन रंगमंच व पिंपरी चिंचवड नाट्यगृह पुणे व आसपास के महत्वपूर्ण नाट्यगृह है।
फिल्म
पुणे मे अनेक मल्टिप्लेक्स है जिसमे मराठी, हिंदी व हॉलीवूड फिल्मे दिखाई जाती है। पुणे रेलवे स्थानक के पास आयनॉक्स, विद्यापीठ रास्ते पर ई-स्क्वेअर, सातारा रस्ता व कोथरूड के पास सीटीप्राईड, कल्याणीनगर के पास गोल्ड ऍडलॅब्स और आकुर्डी के पास फेम गणेश विजन है। मराठी फिल्मे मुख्यतः प्रभात और सीटीप्राईड चित्रपटगृह मे प्रदर्शित होती है।
धर्म-अध्यात्म
चतु:श्रृंगी मंदीर शहर के उत्तर-पश्चिम डोंगर-उतार पर है। मंदीर 90 फुट ऊँचा 125 फुट लम्बा है व इसका व्यवस्थापन चतु:श्रृंगी देवस्थान करता है। नवरात्री के दरमयान मंदीर मे विशेष भीड़ होती है। शहर मे पर्वती देवस्थान भी काफी प्रसिध्द है। पुणे के पास आलंदी व देहू देवस्थान काफी प्रसिध्द है। आलंदी मे संत ज्ञानेश्वर की समाधी और देहू पर संत तुकाराम का वास्तव्य है। हर वर्ष वारकरी संप्रदाय के लोग इन संतो की पालखी लेकर पंढरपुर जाते है। आषाढी एकादशी के मुहूर्त पर पंढरपूर पहुँचते है। पुणे मे भारतीय ज्यु लोगो की बडी बसती है। ओहेल डेविड इस्त्राएल के बाहर एशिया का सबसे बडा सिनेगॉग (ज्यु का प्रार्थनास्थल) है। पुणे मेहेरबाबा का जन्मस्थान और रजनीश के रहने का स्थान था। रजनीश के आश्रम मे देश-परदेश के पर्यटक आते है। आश्रम मे ओशो झेन बाग व बडा ध्यानगृह है। पुणे मे पाषाण नामक गाव है। जहा सोमेशवर का प्राचीन मंदीर है जिसका निर्माण जिजामाता ने किया था।







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