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Thursday, August 13, 2020

करीब 475 साल पुरानी इस जेल में सिर्फ और सिर्फ एक ही कैदी रहता है।

 करीब 475 साल पुरानी इस जेल में सिर्फ और सिर्फ एक ही कैदी रहता है।

किसी महल की तरह दिखने वाली इस जेल में रहता है सिर्फ एक कैदी, मिलती हैं ये सुविधाएं

दुनिया रहस्यों से भरी हुई है। जिधर भी नजरें इनायत करो कुछ न  कुछ अद्भुत और रोचक नजर आ ही जाता है। भारत के गुजरात राज्य की तरफ एक छोर पर देखेंगे तो ऐसा ही कुछ दिलचस्प नजारा दिखेगा। जिसे देखने के बाद आप कंफ्यूज भी हो सकते हैं। समुद्र किनारे एक आलीशान बिल्डिंग नजर आएगी। जो किसी महल की तरह प्रतीत होती है। लेकिन आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि यह कोई महल नहीं बल्कि एक जेल है।

 

यहां बात हो रही है दीव की। केंद्रशासित प्रदेश के रूप में जाने जाने वाले दीव की एक जेल की भव्यता देखकर आश्चर्यचकित हो जाएंगे। किसी जमाने में यह जगह पुर्तगाल की कॉलोनी के भीतर आती थी।

 

करीब 475 साल पुरानी इस जेल में सिर्फ और सिर्फ एक ही कैदी रहता है। जी हां सही पढ़ा आपने। सिर्फ एक कैदी रहता है इस जेल में।

 

कैदी का नाम दीपक कांजी है और उसकी उम्र 30 साल है। दीपक कांजी पर आरोप है कि उसने अपनी पत्नी की जहर देकर हत्या कर दी थी।

 

जेल में कांजी सिर्फ अकेले रहते हैं इसलिए उनकी सुरक्षा में 5 सिपाही और 1 जेलर की तैनाती की गई है। सभी की शिफ्ट घंटों के हिसाब से तय की गई है।

 

2013 में ही इस जेल को बंद करने की घोषणा कर दी गई थी। तब से यहां कैदियों का आना रुका हुआ है। कुछ सालों पहले यहां 7 कैदी हुआ करते थे। जिनमें 2 महिलाएं भी शामिल थीं। लेकिन किन्हीं कारणों से उनमें से 4 का स्थानांतरण गुजरात की अमरेली जेल में कर दिया गया, वहीं 2 कैदियों की सजा की अवधि पूरी हो गई थी लिहाजा उन्हें रिहा कर दिया गया। इसलिए अब सिर्फ एक ही कैदी रह गया है।


दीव जेल में ड्यूटी पर तैनात सिपाही ने मीडिया से बात करते हुए बताया था कि एक कैदी के लिए समय बिताना बहुत मुश्किल हो जाता है। आंकड़ों ते मुताबिक दमन और दीव में प्रत्येक कैदी पर सरकार को 32 हजार रुपये का खर्च आता है। जोकि अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। 

 

जिस बैरक में दीपक रह रहा है। वह 20 कैदियों की जगह वाला बैरक है। उसके लिए खाने का बंदोबस्त पड़ोस के रेस्टोरेंट से किया गया है। वहीं उसे जेल में कुछ समय के लिए दूरदर्शन व अन्य अध्यात्मिक चैनल देखने की अनुमति है। उसे जेल के भीतर गुजराती अखबार और मैगजीन दी जाती हैं। इसके अलावा शाम 4 से 6 बजे तक के बीच वह दो सिपाहियों के साथ खुली हवा में टहल भी सकता है। 

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