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Wednesday, August 12, 2020

पुणे-: पुण्याला पुणे हे नाव कसे पडले,  पुण्याचा इतिहास, भूगोल, आणि पुण्याची संस्कृती माहिती आहे का?....

 पुणे-: पुण्याला पुणे हे नाव कसे पडले,  पुण्याचा इतिहास, भूगोल, आणि पुण्याची संस्कृती माहिती आहे का?....

भाग -- 1     

नाम, इतिहास,


पुणे भारत के महाराष्ट्र राज्य का एक महत्त्वपूर्ण शहर है। यह शहर महाराष्ट्र के पश्चिम भाग, मुला व मूठा इन दो नदियों के किनारे बसा है और पुणे जिला का प्रशासकीय मुख्यालय है। पुणे भारत का छठवां सबसे बड़ा शहर व महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। सार्वजनिक सुखसुविधा व विकास के हिसाब से पुणे महाराष्ट्र मे मुंबई के बाद अग्रसर है। [19][20])अनेक नामांकित शिक्षणसंस्थायें होने के कारण इस शहर को 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' भी कहा जाता है। पुणे में अनेक प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाईल उपक्रम हैं, इसलिए पुणे भारत का ”डेट्राइट” जैसा लगता है। काफी प्राचीन ज्ञात इतिहास से पुणे शहर महाराष्ट्र की 'सांस्कृतिक राजधानी' माना जाता है। मराठी भाषा इस शहर की मुख्य भाषा है।

Country               भारत
राज्य                      महाराष्ट्र
जिला                        पुणे
• प्रणाली               नगरपालिका
 सभा                  पुणे महानगर पालिका
क्षेत्रफल
 पुणे शहर          331.26 किमी2(127.90 वर्गमील)
 मेट्रो                 7,256.46 किमी2(2,801.73 वर्गमील)
ऊँचाई                    560 मी (1,840 फीट)

पुणे शहर मे लगभग सभी विषयों के उच्च शिक्षण की सुविधा उपलब्ध है। पुणे विद्यापीठ, राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, आयुका, आगरकर संशोधन संस्था, सी-डैक जैसी आंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थान यहाँ है। पुणे फिल्म इन्स्टिट्युट भी काफी प्रसिद्ध है।

पुणे महाराष्ट्र व भारत का एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र है। टाटा मोटर्स, बजाज ऑटो, भारत फोर्ज जैसे उत्पादनक्षेत्र के अनेक बड़े उद्योग यहाँ है। 1990 के दशक मे इन्फोसिस, टाटा कंसल्टंसी सर्विसे, विप्रो, सिमैंटेक, आईबीएम जैसे प्रसिद्ध सॉफ्टवेअर कंपनियों ने पुणे मे अपने केंन्द्र खोले और यह शहर भारत का एक प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी उद्योगकेंद्र के रूप मे विकसित हुआ।

नाम --

पुणे यह नाम 'पुण्यनगरी' नाम से आया समझा जाता है। यह शहर ई.स. 8 के शतक मे 'पुन्नक' (या 'पुण्यक') नाम से जाना जाता था, ऐसा सन्दर्भ मिलता है। ई.स. 11 के शतक मे 'कसबे पुणे' या 'पुनवडी' नाम से जाना जाने लगा। मराठा साम्राज्य के काल खंड मे शहर का नाम 'पुणे' मे रूप मे उपयोग मे लाया जाने लगा। ब्रिटिश ने उसे 'पूना' कह कर संबोधित करने की सुरुआत की। अब यह पुणे, इस आधिकारिक नाम से जाना जाता है।

इतिहास ---

आठवी शताब्दी मे पुणे को पुन्नक नाम से जाना जाता था। शहर का सबसे पुराना वर्णन ई.स. 758 का है, जब उस काल के राष्ट्रकूट राज मे इसका उल्लेख मिलता है। मध्ययुग काल का एक प्रमाण जंगली महाराज मार्ग पर पाई जाने वाली पातालेश्वर गुफा है, जो आठ्वी सदी की मानी जाती है।

17वीं शताब्दी मे यह शहर निजामशाही, आदिलशाही, मुगलऐसे विभिन्न राजवंशो का अंग रहा। सतरहवी शताब्दी में शहाजीराजे भोसले को निजामशाहा ने पुणे की जमींदारी दी थी। इस जमींदारी मे उनकी पत्नी जिजाबाई ने ई.स. 1627में शिवनेरी किले पर छत्रपती शिवाजीराजे भोसले को जन्म दिया। शिवाजी महाराज ने अपने साथियों के साथ पुणे परिसर में मराठा साम्राज्य की स्थापना की। इस काल मे पुणे में शिवाजी महाराज का वर्चस्व था। आगे पेशवा के काल मे ई.स. 1749 सातारा को छत्रपति की गद्दी और राजधानी बना कर पुणे को मराठा साम्राज्य की 'प्रशासकीय राजधानी' बना दी गई। पेशवा के काल मे पुणे की काफी तरक्की हुई। ई.स. 1818 तक पुणे मे मराठों का राज्य था।

मराठा साम्राज्य



पुणे शिवाजी महाराज के जीवन व मराठा साम्राज्य के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अंग है। ई.स. 1635-36 के दरमयान जब जिजाबाई व शिवाजी महाराज पुणे आवास के लिए आए, तबसे पुणे के इतिहास में एक नए पर्व का जन्म हुआ। शिवाजी महाराज व जिजामाता पुणे में लाल महाल मे रहते थे। पुणे के ग्रामदेवता- कसबा गणपती की स्थापना जिजाबाई ने की थी।

17वीं शतब्दी के प्रारंभ में, छत्रपती शाहू के प्रधानमंत्री, थोरले बाजीराव पेशवे को पुणे को अपना स्थाई आवास बनाना था। छत्रपती शाह महाराज ने इसकी अनुमती दी व पेशवा ने मुठा नदी के किनारे शनिवारवाडा बनाया।

खरडा इस ऐतिहासिक किले पर मराठों एवं निज़ाम के बीच ई.स. 1795 के बीच युध्द हुआ। ई.स. 1817 को पुणे के पास खडकी ब्रिटिश व मराठों में युध्द हुआ। मराठो को इस युद्ध में पराजय का सामना करना पड़ा व ब्रिटिश ने पुणे को अपने कबजे मे कर लिया। ब्रिटिश ने पुणे के महत्व को समझते हुए शहर के पूर्व मे खडकी कँटोन्मेंट (लष्कर छावनी) की स्थापना की। ई.स. 1858 मे पुणे महानगरपालिका की स्थापना हुई। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पुणे मे अनेक नामांकित शिक्षण संस्थाओ की स्थापना हुई।

स्वातंत्रा संग्राम



भारतीय स्वातंत्रा संग्राम मे पुणे के नेताओं और समाज सुधारकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। लोकमान्य तिलक और सावरकर जैसे नेताओं के कारण पुणे राष्ट्र के नक्शे पर अपने महत्व को दर्शाता रहा। महादेव गोविंद रानडे, रा.ग. भांडारकर, विठ्ठल रामजी शिंदे, गोपाल कृष्ण गोखले, महात्मा फुले जैसे समाजसुधारक व राष्ट्रीय ख्याती के नेता पुणे से थे।

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