व्यक्ति की कुण्डली (Kundali) में एक ऐसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है. इस दोष को पितृदोष (Pitra Dosh) के नाम से जाना जाता है. शास्त्र के अनुसार सूर्य (Surya) तथा राहू (Rahu) जिस भी भाव में बैठते हैं, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते हैं.
कुंडली में पितृ दोष तब होता है जब सूर्य, चन्द्र, राहु या शनि में दो कोई दो एक ही घर में मौजूद हो। जिन लोगों की कुंडली में पितृदोष बनता है उन्हें तमाम तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। पितृदोष होने पर उस व्यक्ति के जीवन में उसे कई तरह के संकेत मिलते हैं
शास्त्रों के अनुसार जब व्यक्ति इस संसार में जन्म लेता है तो उसके भाग्य का निर्धारण पहले से हो जाता है। जन्म के समय ज्योतिष विद्या के माध्यम से उस व्यक्ति की ग्रहों और नक्षत्रों की चाल से कुंडली बनाई जाती है। कुंडली में कई तरह के दोष पाए जाते हैं उन्हीं में से एक दोष होता है पितृ दोष। ज्योतिष में पितृ दोष को अशुभ और दुर्भाग्य का कारक माना जाता है। कुंडली में पितृ दोष तब होता है जब सूर्य, चन्द्र, राहु या शनि में दो कोई दो एक ही घर में मौजूद हो। जिन लोगों की कुंडली में पितृदोष बनता है उन्हें तमाम तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। पितृदोष होने पर उस व्यक्ति के जीवन में उसे कई तरह के संकेत मिलते हैं।
कुंडली में पितृ दोष होने पर संतान संबंधी समस्याएं होती है। जातक को संतान पैदा करने में दिक्कतें आती हैं।
-पितृ दोष होने पर पीडित व्यक्ति को हमेशा धन की कमी बनी रहती है और पैसा का नुकसान होता है।
-कुंडली में पितृ दोष होने पर शादी में तमाम तरह की परेशानियां आती है। शादी होने के बाद भी पति-पत्नी में अक्सर विवाद बना रहता है।
-पितृ दोष होने पर व्यक्ति हमेशा विवाद और मुकादमों के चलते परेशान रहता है।
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष के लक्षण होते हैं तो उसके परिवार के सदस्य हमेशा बीमार रहते हैं जिसके कारण से हमेशा अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर रहते हैं।
-इस दोष से पीड़ित व्यक्ति के विवाह में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और मनचाहा जीवन साथी मिलने में परेशानी आती है।
पितृ दोष के कारण क्या नुकसान देखने को मिलते हैं?
- व्यक्ति को मानसिक परेशानी हमेशा लगी रहती है तथा पारिवारिक संतुलन नहीं बैठ पाता है
- जीवन में बहुत ज्यादा पैसा कमाने के बाद भी घर में बरकत नहीं हो पाती है
- स्वयं निर्णय लेने में बहुत परेशानी होती है तथा लोगों की सलाह अधिक लेनी पड़ती है
- परीक्षाओं तथा साक्षात्कार में भी असफलता मिलती है
- यदि आप सरकारी या प्राइवेट नौकरी में है तो अपने उच्च अधिकारियों कि नाराजगी झेलनी पड़ती है
- वंश वृद्धि नही हो पाती है संतान प्राप्ति में बहुत ज्यादा बाधाएं आती हैं
बिना जन्मकुंडली के पितृदोष के लक्षण कैसे पहचानें?
- सुबह के समय उठने के बाद परिवार में अचानक कलह क्लेश होता है
- विवाह की बात अक्सर बनते बनते बिगड़ जाती है
आपको बार-बार यदि आपको चोट लगती है और दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं
- घर मे मांगलिक कामों में विघ्न आता ही रहता है
- अक्सर घर की दीवारों में दरारें भी आती है
- परिवार में या घर मे मेहमान आना बंद हो जाते है
- दाम्पत्य जीवन के क्लेश के कारण जीवन के मुश्किलें आ जाती है
कैसे करें पितृदोष का महाउपाय?
पितृदोष को खत्म करने के लिए हर अमावस्या पर अपने पूर्वजों और पितरों के नाम से जितना हो सके लोगों को दवा वस्त्र भोजन का दान करें
- हर बृहस्पतिवार और शनिवार की शाम पीपल की जड़ में जल अर्पण करें और उसकी सात परिक्रमा करें
- शुक्लपक्ष के रविवार के दिन सुबह के समय भगवान सूर्यनारायण को तांबे के लोटे में जल गुड़ लाल फूल रोली आदि डालकर अर्पण करना शुरू करें
- माता पिता और उनके समान बुजुर्ग व्यक्तियों को चरण स्पर्श करें आशीर्वाद लें




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