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Monday, September 21, 2020

दुनिया की सबसे ऊंची 'अटल' टनल तैयार, 80 किमी की रफ्तार से हर दिन गुजरेंगे पांच हजार वाहन

 
Atal Rohtang Tunnel : 10,171 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस सुरंग को देश की सबसे ऊंची और लंबी रोड टनल के तौर पर जाना जाता हैइस पुल को बनने में करीब 10 साल का वक्त लगा, इसे र्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन बनाया है



  • सुरंग में 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की अधिकतम गति से हर दिन 5000 वाहन गुजर सकेंगे
    • 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी है यह सुरंग
    • नौ किलोमीटर है इस सुरंग की लंबाई
    • 10 वर्ष लगे हैं इस सुरंग के निर्माण में
    • पहले जो सफर पांच घंटे में पूरा होता था अब वह 10 मिनट में पूरा हो जाएगा
    दुनिया की सबसे ऊंची 'अटल' टनल अब उद्घाटन के लिए तैयार है। 10 हजार फीट पर स्थित दुनिया की सबसे लंबी रोड टनल को बनाने में दस साल लग गए। इसका नाम है 'अटल रोहतांग टनल'।इसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है। सितंबर में इस टनल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे

    निर्माण शुरू होने पर इसकी लंबाई 8.8 किलोमीटर तय थी, लेकिन निर्माण पूरा होने पर जब जीपीएस रीडिंग ली गई तो सुरंग की लंबाई नौ किलोमीटर निकली। यह दुनिया की ऐसी पहली सुरंग है जिसे लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। इसके शुरू होने पर मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी। आइए एक नजर डालते हैं इस टनल की विशेषताओं पर...

  • एस्केप सुरंग: इसमें एक आपातकालीन एस्केप सुरंग भी शामिल है, जिसे मुख्य सुरंग के नीचे बनाया गया है। यह आपातकालीन निकास प्रदान करेगा, जो मुख्य सुरंग को अनुपयोगी बना सकता है। ऑल वेदर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए मनाली से टनल तक पहुंच मार्ग पर स्नो गैलरियां भी बनाई गई हैं।


    कनेक्टिविटी और सुरक्षा: सुरंग में हर 150 मीटर पर टेलीफोन, हर 60 मीटर पर एक फायर हाइड्रेंट, 500 मीटर पर आपातकालीन निकास, हर 2.2 किलोमीटर पर हवा की गुणवत्ता की निगरानी प्रणाली, 250 मीटर पर सीसीटीवी कैमरों के साथ प्रसारण प्रणाली और घटना का पता लगाने वाली स्वचालित प्रणाली लगाई गई है।


    समय की बचत: हिमालय की पीर पंज पर्वत श्रेणी में बनी यह सुरंग रोहतांग दर्रे तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग भी होगी, जो 13 हजार 50 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। अभी मनाली घाटी से लाहौल स्पीति घाटी की यात्रा में आमतौर पर पांच घंटे से अधिक समय लगता है जो अब 10 मिनट से कम समय में पूरा हो जाएगा।


    यह 10.5 मीटर चौड़ी दो लेन वाली सुरंग है। इसमें आग से सुरक्षा के सभी उपाय मौजूद हैं, साथ ही आपात निकासी के लिये सुरंग के साथ ही बगल में एक और सुरंग बनाई गई है। इस सुरंग का निर्माण हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों को सदैव कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है जो शीत ऋतु के दौरान लगभग 6 महीने तक लगातार शेष देश से कटे रहते हैं। सेरी नुल्लाह डिफ़ॉल्ट ज़ोन इस सुरंग के अंदर है।


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