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Friday, January 29, 2021

वन रेंजर एक विचित्र खोज करता है - वह एक पल के लिए भी संकोच नहीं करता और तुरंत पुलिस को कॉल कर देता है

 अनजाने में, वन रेंजर, पैट्रिक, अपनी दैनिक सैर के लिए अपने स्थानीय जंगल में चला गया।

लेकिन फिरअचानकउसकी नज़र कुछ ऐसी चीज़ पर पड़ी जिसे उसने पहले कभी नहीं देखा थाजमीन से बाहर निकले हुए धातु के दो बड़े ट्यूब। ये कहां से आए थे?

जब वह उनके करीब पहुंचातो उसे ट्यूब से बेताब और हताश आवाज़ सुनाई दी...


पैट्रिकजो एक उत्साही वनपाल थाउसने एक संरक्षणवादी के रूप में हाल ही में अपना काम शुरू किया था। वह जर्मनी के दक्षिण में एक बड़ेविविध जंगल का प्रबंधन करता था।

अपने शुरुआती दिनों के दौरानवह नए क्षेत्र से वाकिफ होने में व्यस्त थाजब अचानक उसे ये दो अजीब ट्यूब दिखाई दीं। वह इस जंगल में सैकड़ों बार गया थालेकिन उसे पहले यह कभी नहीं दिखाई दी थीं।

पैट्रिक ने सोचायह वेंटिलेशन पाइप के लिए एक अजीब जगह थी। उसने करीब से देखने का फैसला किया। उसकी सोच के बिलकुल विपरीतउसने कुछ ऐसा सुना जिसकी उसे बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी। उसे ट्यूब से एक बेकरार आवाज़ सुनाई दी।

क्या यह किसी व्यक्ति की आवाज थी!?


पैट्रिक ट्यूब के करीब चला गयाउसने अपने कान ट्यूब के करीब किएऔर फिर वह निश्चित रूप से जानता था। उसने जमीन के नीचे से एक आवाज आते हुई सुनी थी। तेजसमझी  सकने वालीलेकिन स्पष्ट रूप से हताश।

"हेलोक्या वहां नीचे कोई है!!??"

एक पल के लिए तो वहां शांति थी। शायद यह उसकी कल्पना ही थी और उसने पाइप के माध्यम से सिर्फ हवा की आवाज़ सुनी थी। वह अपने रास्ते की ओर बढ़ने ही लगा था कि फिर उसने कुछ ऐसा सुनाजिसे सुन उसके रोंगटे खड़े हो गए।

"मदद करोमदद करो!"

पाइप के माध्यम से उसे नीचे ज़मीन से मदद की चीख सुनाई दी...


पैट्रिक ने तुरंत अपने इंटरकॉम रेडियो को बाहर निकाला और एक सहयोगी को मदद भेजने के लिए कहा।

वह अपने रेडियो उपकरण में चिल्ला कर बोला, "क्या कोई हैक्या कोई मेरी मदद कर सकता है?" लेकिन कोई जवाब नहीं आया। "मुझे लगता है कि कोई जंगल में नीचे फंसा हुआ है और मुझे मदद की ज़रूरत है" लेकिन दूसरी तरफ से फिर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

पैट्रिक ने अपनी जेब से अपना फोन निकाला और आपातकालीन नंबर पर कॉल किया। लाइन के दूसरे छोर पर उपलब्ध महिला ने पुलिस को भेजने का वादा कियालेकिन इसमें कम से कम एक घंटा लगने वाला था। महिला ने उसे बताया, "इस जगह तक पहुंचना मुश्किल है। हम जल्द से जल्द वहां पहुंचने की पूरी कोशिश 

करेंगे।"

उसने सोचाअगर मदद  जाए तो बहुत अच्छा होगा। क्या मैं खुद इस व्यक्ति को बाहर नहीं निकाल सकता?!


मदद रस्ते में थीलेकिन पैट्रिक यह सहन नहीं कर पा रहा था कि वह उस व्यक्ति को वहां अकेला छोड़ दे। उसने खुद ही जांच पड़ताल करने का फैसला लिया। एक टॉर्च और अपने फोन के साथ सशस्त्रवह प्रवेश द्वार की तलाश में निकल गया।

पैट्रिक ने खुद से कहा, "वैसे वह आवाज़ कहाँ से आई थी?! मैं उस व्यक्ति के पास कैसे पहुँच सकता हूँ?!"

ट्यूबों के पास कोई भी प्रवेश द्वार दिखाई नहीं दे रहा थाइसलिए उसने पास की पहाड़ी पर चढ़ने का फैसला किया। पहाड़ी के दूसरी ओरकंक्रीट से बना एक प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा था। पैट्रिक ने एक पल के लिए भी संकोच नहीं किया और वह उस द्वार के माध्यम से अंदर चला गया।

अंदर घना अंधेरा था। ध्यान सेपैट्रिक ने अपनी टॉर्च को चालू किया और सीधा आगे की ओर देखने लगा। वह यह कहाँ  गया हैयह भूतिया फिल्म के गलियारों की तरह लग रहा था...


उसके पास केवल एक ही विकल्प थासीधा आगे की ओर बढ़ने का। धीरे-धीरेपैट्रिक ने आगे से आने वाली आवाज़ों पर ध्यान केंद्रित करते हुए आगे बढ़ना शुरू किया। यहाँ से भी मदद की गुहार सुनाई दे रही थी।

पैट्रिक ने सोचास्पष्ट रूप से मैं अकेला नहीं हूं जो हाल ही में यहां आया है। वहां की दीवारों पर भित्तिचित्र बने हुए थेऔर कुछ स्थानों परप्लास्टिक के रैपर भी पड़े थे।

वह अब उस आवाज़ को और स्पष्टता से सुन पा रहा था। "मेरी मदद करोकृपया कोई मेरी मदद करो!" वह आवाज़ के स्रोत की तरफ दौड़ा और एक ऐसे गलियारे में जा पहुंचा जहाँ आगे एक और कमरे की तरफ रास्ता निकल रहा था। अचानक से उसे एक तेज़ आवाज़ सुनाई दी। साथ वाले कमरे में कोई धातु की वस्तु ज़मीन पर गिरी थी।

क्या यहाँ कोई और भी मौजूद थाक्या यह चिंता की बात थी?


पैट्रिक ने आगे बढ़कर देखा कि उसके आसपास के सभी स्थान पानी की एक परत से भरे हुए थे। जोर के धमाके की आवाज़ उसकी दाईं ओर से आई थीलेकिन वहां तो कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था। वह सिर्फ पानी की एक धारा से आने वाली आवाज़ को सुन पा रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे यह आवाज़ पानी की एक फटी हुई पाइप से  रही थीजो तेज़ी से गलियारे को पानी से भर रही थी!

दूसरी तरफ से आने वाली आवाज़ ने पूछा, "वहां कौन है?" यह आवाज़ उसी बाईं ओर से आई थी। पैट्रिक ने सोचाठीक हैमैं अपने पैरों को गीला होने देता हूँ। उसने एक पल के लिए भी संकोच नहीं किया और सावधानी बरतते हुए वह आवाज़ की तरफ बढ़ाजो गलियारे के दूसरी तरफ से  रही थी।

उस दरवाज़े को खोलना आसान नहीं थालेकिन अंत में पैट्रिक सफल हुआ। लेकिन उसने उस दरवाजे के पीछे कुछ ऐसा देखा जिसकी उसने कभी उम्मीद नहीं की थी...


दरवाजे के पीछे एक अजीब सी जगह थी। क्या यहाँ एक और दरवाजा थायह एक पनडुब्बी के प्रवेश द्वार की तरह लग रहा था। और उसके पीछेएक और दरवाज़ा था। यह कौन सी जगह हैऔर ये सभी मार्ग किसके लिए हैं?

पैट्रिक द्वारा सुनी गई आवाज अब स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही थी। एक भयभीत आवाज़ ने पूछा, "हेलोमैं यहाँ हूँक्या आप मुझे सुन सकते हैं?" पैट्रिक अब तक काफी करीब  गया था और वह उस व्यक्ति को जल्दी से ढूंढने में सफल होना चाहिए। जैसे-जैसे वह दरवाज़ों से अंदर जाता गयाउसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

जैसे-जैसे वह इस भूमिगत कॉम्प्लेक्स में आगे बढ़ता गयावह जगह और ठंडी और नम होती गई। जब पैट्रिक अंतिम द्वार के माध्यम से अंदर घुसातो अंदर देख उसके दिल की धड़कन ही रुक गई। उसने अपने मुँह पर हाथ रखा और उसकी आँखों में से आंसू छलकने लगे।


छोटे से कमरे के एक कोने में एक बुजुर्ग महिला फर्श पर बैठी हुई थी। वह ठंड से कांप रही थी और काफी परेशान दिख रही थी। उसके कपड़े काफी गंदे थे। पैट्रिक ने जल्दी से अपना कोट उतारा और उसे उस महिला को ओढ़ने के लिए दे दिया।

पैट्रिक ने महिला से पूछा, "मैडमआप यहाँ क्या कर रही हैंआप यहाँ कैसे पहुंची?" उसने फिर से मदद मांगने के लिए अपना फोन निकालालेकिन वहां कोई सिग्नल नहीं थे।

महिला ने रोते हुए और निराश स्वर में जवाब दिया, "मैं रास्ता भटक गई थी!"

इसके बाद उस महिला ने पैट्रिक को जो बतायावह सुन उसका दिल ही टूट गया!



उसने पैट्रिक को बताया, "मेरे पति का छह महीने पहले निधन हो गया था और उन्होंने लगभग अपनी पूरी ज़िन्दगी यहां काम किया था। मैं एक आखिरी बार उनके पास जाना चाहती थी। वास्तव में उन्हें अलविदा कहने के लिए।"

उसने पैट्रिक को बताया कि भूमिगत परिसर ने दशकों तक सरकार के लिए अनुसंधान केंद्र के रूप में काम किया था। उनके पति ने कई वर्षों तक यहां परियोजनाओं पर काम करने का आनंद लिया और उनके पति को अपने द्वारा दिए गए योगदान पर गर्व था।

"मैं उन्हें अपने साथ ले कर आई थी..." उसने अपने बैग से एक छोटा कलश निकाला और उसे पैट्रिक को दिखाया। यह सब सुन पैट्रिक काफी भावुक हो गयालेकिन वह यह भी जानता था कि इससे पहले कि पूरी जगह पानी से भर जाएउन्हें जल्दी से बाहर निकलने का रास्ता खोजना होगा...


पैट्रिक ने महिला की मदद की और बाहर जाने के रास्ते पर उन्हें सहारा भी दिया। साथ मेंवे उस उन द्वारों के माध्यम से बाहर निकल आए जहाँ से पैट्रिक ने प्रवेश किया था। सौभाग्य सेउन कमरों में अभी ज़्यादा पानी नहीं भरा था।

आख़िरकारउन्हें रोशनी दिखाई देने लगी और वे जानते थे कि अब निकास दूर नहीं है। वे लोग काफी धीरे आगे बढ़ रहे थेलेकिन पैट्रिक उस बूढ़ी महिला पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहता था। एक बार बाहर निकलने परउसने उस महिला को एक गिरे हुए पेड़ के तने पर बिठा दिया।

महिला ने निराश होकर पूछा"अब मैं अपने पति की राख का क्या करूँ?"


घटना के दो हफ्ते बादपैट्रिक और बुजुर्ग महिला ने परिसर को रेत से भरने की व्यवस्था की। चूंकि अब उसे एक अनुसंधान केंद्र के रूप में उपयोग नहीं किया जाता थाउन्होंने सोचा कि बेहतर होगा कि वे लोग इस परिसर को प्रकृति को वापस लौटा दें।

एक आखरी बार वे लोग उस जगह पर गए जहाँ वह अनुसंधान केंद्र होता था। पैट्रिक ने महिला को सुझाव दिया कि वह अंतिम श्रद्धांजलि के रूप में अपने दिवंगत पति की राख को ट्यूबों के पास छिड़क दें। आम तौर परएक प्रकृति आरक्षित क्षेत्र में इसकी अनुमति नहीं थीलेकिन पैट्रिक ने चुपके से उन्हें ऐसा करने दिया।

गर्मियों के एक सुंदर दिन के अंत मेंअंततः उस बूढ़ी महिला ने अपने प्रिय पति की राख को वहां बिखेर दियाजहाँ सालों तक उनके पति का पसंदीदा अनुसंधान केंद्र हुआ करता था...




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