ख़ूबसूरती बयाँ करती दुनिया की तस्वीरें
हमारी दुनिया कई हैरान करने वाली चीज़ों और नज़ारों से भरी है. फिर वह चाहे विशालकाय कछुआ हो या 5 मीटर लंबा प्राचीन राइन्हो या विशालकाय सफ़ेद शार्क मछली या फिर पृथ्वी के ख़ूबसूरत नज़ारे.
बीबीसी अर्थ को उसके यूज़र्स ने ऐसी चौकाने वाली तस्वीरें भेजी हैं जिनसे पृथ्वी के वन्यजीव, प्रकृति, पर्वतों का बख़ूबी अहसास होता है.
विशालकाय हाथियों का समूह जब किसी सड़क से गुज़रे, तो ट्रैफिक तो बंद हो ही जाएगा. ये तस्वीर नाताशा एलन ने भेजी हैं.
हाथियों के झुंड में केवल हथिनियाँ और बच्चे ही रहते हैं। झुंड की सबसे बुजुर्ग हथिनी ही पूरे झुंड की नेता होती है। ... हाथी की तरह ही और भी कुछ जानवर समूह में एक साथ रहते हैं। जानवरों के ऐसे समूह को झुंड कहते हैं।
हाथी की उम्र 100 वर्ष से अधिक होती है। हथिनियों में गर्भावस्था 18 से 22 महीने तक की होती है। प्रत्येक मिनट हाथी 2 से 3 बार ही सांस लेता और छोड़ता है। हाथी इकलौता ऐसा जानवर है जो कूद नहीं सकता, लेकिन यह लंबे समय तक तैरने की क्षमता रखता है।
आसमान, पहाड़ और नदी, सभी एक साथ दर्शा रहे हैं प्रकृति की ख़ूबसूरती. ये तस्वीर सेविन नॉर्डरम की है.
सुबह उठकर प्रकृति की सुंदरता को निहारना किसे अच्छा नहीं लगता। नदी, रेत, पहाड़, झरने, पत्थर, आसमान इन सब ने मिलकर हमारे प्रकृति को बेहद ही खूबसूरत बनाया है। लेकिन आजकल के इस आपाधापी भरे जीवन में समय किसके पास है कि वह उठकर अपने आसपास के वातावरण का आनंद ले सके।
प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का बखान शब्दों में करना नामुकिन सा है। इसीलिए हम आपको तस्वीरों में प्रकृति से जुड़े कुछ सुंदर दृश्य दिखा रहे हैं।
तो फिर देर किस बात की, स्लाइडर घुमाइए और बनाइए अपने सुबह को और भी खुशनुमा। काश हर दिन हम सबको इस दृश्य में जीने का मौका मिल पाता।
कैटरपिलर की यह तस्वीर वोलकेनो जूली ने भेजी है.
कैटरपिलर का मतलब इल्ली होता है। जितनी भी तितलियाँ या मोथ हैं सभी के अंडे से पहले इल्ली बनती है। धीरे-धीरे यह कैटरपिलर बड़ी होती है और बटरफ्लाय में चेंज हो जाती है। कैटरपिलर में स्पेशल ग्लैंड होती है जिसकी सिकरिशन से वे सिल्क बनाती हैं। कैटरपिलर के सिर पर 12 छोटी-छोटी आँखें होती हैं जिसे 'ओसिली' कहा जाता है। इसके सिर पर दो जोड़ी जबड़े भी जुड़े रहते हैं, जो मेंडीबल्स कहलाते हैं।
अमरीका में आने वाले ऐसे ही तूफ़ान टॉरनेडो कहलाते हैं. ये तस्वीर माइक वेनडरहोएक की है.
अलबामा और छह अन्य दक्षिणी राज्यों में आये टॉरनेडो तूफ़ान में तीन सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी थी। वैज्ञानिकों ने तूफ़ान को अलग-अलग रूप में परिभाषित किया है। जिस तरह से भूकंप को अलग-अलग तीव्रता के आधार पर बांटा जाता है, ठीक इसी प्रकार तूफ़ान के भी अलग-अलग प्रकार होते हैं। इनको भी तीव्रता के आधार पर मापा जाता है। किसी की उत्पत्ति समुद्र से होती है, तो किसी की हवाओं के संयोग से। इसी आधार पर इन्हें भिन्न-भिन्न नामों से इसे पुकारा जाता है। टायफ़ून, टॉरनेडो विनाशकारी तूफ़ान की श्रेणी में आते हैं। हालांकि, इन दोनों में काफ़ी कुछ समानताएं भी हैं। लेकिन टॉरनेडो अपनी प्रकृति, रूप रंग और संरचना के हिसाब से अन्य तूफ़ानों और चक्रवातों से बिल्कुल अलग है। टॉरनेडो के कारण अक्सर घरों के छत उड़ जाते हैं। अन्य चक्रवातों का उद्गम जहां समुद्र होता है, वहीं टॉरनेडो मैदानी भागों में हवाओं के जरिये उत्पन्न होता है। टॉरनेडो को चक्रवात की श्रेणी में नहीं आता है। यह एक अलग प्रकार का तूफ़ान है।
एरिक हेनेसन पेडेरसन की ये तस्वीर आसमान की ख़ूबसूरती बयाँ कर रही है.
इंसान के वजूद के लिए आसमान का होना बेहद ज़रूरी है, इसी से हमें बारिश मिलती है और इसी से हमें धूप भी मिलती है। इसी से आसमान के ऊपर शायरों ने भी अपने कलाम लिखे हैं। किसी ने आसमान की ऊंचाई से अपने ज़ज़्बे को मापा है तो किसी ने आसमान में ख़ुदा को ढ़ूंढ़ने की कोशिश की है लेकिन यह हमेशा ही मानवीय-जिज्ञासा का विषय रहा है। पढ़ते हैं कुछ ऐसे ही शेर जो आसमां की इन्हीं खूबियों को अपने में समेटे हुए हैं।
रॉबिन एडगर की इस तस्वीर में दूर दूर तक जमा हुआ पानी एक अलग नज़ारा पेश कर रहा है.
जलप्रपात पहाड़ की ऊँचाई से नदियों के पानी के गिरने से बनते है | पानी जब काफी ऊँचाई से जमीन पर गिरता है तो इससे बड़ा ही अद्भुद नजारा बनता है | दुनिया के कई जलप्रपात अपनी सुन्दरता और विशालता के लिए जाने जाते है और यहाँ बड़ी संख्या में पर्यटक भी आते है |
रेडार बर्ग की इस तस्वीर में पहाड़ पर जमी बर्फ़ और आसमान सम्मोहक दृश्य पेश कर रहे हैं.
लोग अक्सर पूछते हैं, क्यूँ हम बर्फीले पहाड़ों में जीवन बसर करते हैं?
मैं पूछती हूँ बता मुझको एक जगह जहां मिलती है हर सहूलियत,
कहीं सूरज का तेज है, कहीं रेत का आडम्बर,
फिर मेरे पहाड़ों का क्या दोष?
इस पर गिरती है अक्सर बर्फ, चाहे मई हो या दिसंबर।
पहाड़ हो या बर्फ,
ख़ूबसूरती को कितना भी बयाँ करो अधूरा है,
करने को महसूस इसे, यहां हर लम्हा जीना ज़रूरी है।
बर्फ की चादर से जब-जब पहाड़ ढकते हैं,
दिल के दायरे में ना जाने कितने अरमान उलझते हैं।
सफ़ेद बर्फ से ढकी राहों पर जब तुम-हम चलते हैं,
ना जाने कितनी बार गिरते-फिसलते हैं।
इस एहसास को जीने को, बेहिसाब दिल तरसते हैं।
बर्फ के फूल जब-जब बरसते हैं, लगता है धरती, धरती नहीं, जन्नत हो मानो,
कुदरत की इस नुमाइंदगी को देखने को, कितने दिल धड़कते हैं।








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